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शनिवार, 1 मई 2021

कोरोना के धुँधले अंधेरे के बीच चमकते कुछ उजाले

 राष्ट्र जहाँ कोरोना त्रासदी झेल रहा है वहीं लोग अपने किरदार को अपने अन्दाज़ में प्रस्तुत कर रहें हैं, मतलब आपदा में अवसर वाली निकृष्ट मानसिकता के लोग सक्रिय हैं तो कहीं महर्षि दधीचि जैसे शृष्टि के उपकार के लिए अपने शरीर तक को दान कर देने वाले लोग । “( महर्षि दधीचि ने अपने शरीर का दान कर दिया था जिससे उनकी हड्डियों द्वारा अस्त्र बनाए गए थे जिससे पीठ की हड्डी से वज्र और सिर से ब्रह्मशिर नामक अस्त्र बनाए गए थे और देवताओं ने उक्त अस्त्रों द्वारा असुरों पर विजय पायी थी )” हाँ तो पहले उजले पक्ष की बात करें,जो आज भी भारतीय सनातन परम्परा के लिए प्रेरणाश्रोत है,मैं बात करने जा रहा हूँ नारायण भाऊराव दाभाडकर जी की जो नागपुर के रहने वाले  उम्र 85वर्ष, हाल में जब कोरोना ग्रस्त हुए तो बेटी ने बड़ी मुश्किल से इंदिरा गांधी शासकीय अस्पताल में भर्ती कराया, पर कुछ दिनों में वहीं एक युवा 40 वर्ष का जो कोरोना से ग्रस्त था अस्पताल आया उसकी पत्नी का रो रोकर बुरा हाल था  उसके छोटे बच्चे थे, पर कोई ऑक्सिजन सुविधा से सम्पन्न बेड ख़ाली नही था। उक्त अवसर पर सनातन परम्परा के उच्च आदर्शों से सुशोभित नारायण भाऊराव जी जो उसी अस्पताल में अपना इलाज करा रहे थे उन्होंने अपने बेड को उक्त मरीज़ को देने के लिए स्वेक्षा प्रस्तुत की,जबकि उनका भी ऑक्सिजन समुचित स्तर से नीचे चल रहा था, अस्पताल प्रशासन से कहा मैंने लगभग अपनी ज़िंदगी पूर्ण कर ली है,पर उक्त मरीज़ पर अभी ज़्यादा ज़िम्मेदारी हैं और अपना बेड दे दिया। जबकि ३दिन के बाद नारायण जी का निधन हो गया। इससे ये पता चलता है की अभी भी महर्षि की परम्परा के ध्वजवाहक हैं।

अब आते हैं, आपदा में अवसर की निकृष्ट मानसिकता के लोगों पर जैसे ही सरकार ने वैक्सिनेशन की घोषणा की आ गए वैक्सीन पंजीकृत का ढोंग रचकर ओटीपी द्वारा बैंक खाते को ख़ाली करने वाले लोग, ख़ैर ये तो कुछ भी नही अभी हाल में पता चला की रेमेडेसविर की फ़र्ज़ी कम्पनी चलाने लगे और अन्य दवाई पर नई फ़र्ज़ी रेमेडेसविर का चिप्पक. ये दवा पहले से तो कालाबाज़ारी का शिकार थी ही अब ये नया काम शुरू हो गया।

एक और दुखद पक्ष पता चला की नॉएडा में अन्य जगह भी ऐसा होगा, लोग अस्पताल से बातचीत करके (जिसे अपनी बोलचाल में सेटिंग कहते हैं) करके पहले से बेड पर स्वस्थ रहते हुए भी क़ाबिज़ हो गए (अंदेशा है कि अस्पताल में कोविड का पैसा राज्य सरकार देंगी तो अस्पताल मोटा पैसा वसूलने के लिए फ़र्ज़ी बिल द्वारा, कारनामे को कर सकती) जो भी हो या फ़र्ज़ी बेड क़ाबिज़ लोगों ने ये भी सोचा होगा कि भविष्य में यदि उनके  परिवार के लिए ग़र ज़रूरत होगी तो ये हमारी आरक्षित शय्यिका/बेड काम में आ जाएगा पर जिनको वास्तव में आवश्यकता है उनका क्या होगा? ये विचारणीय क्यूँ नही ?

अस्पताल अपनी  आय में मानवता का गला घोंटकर वृद्धि करने पर आमादा गर हैं तो क्यूँ ?जो भी वास्तविकता हो पर दोनों कारनामे घृणित ही कहे जाएँगे।

इसमें कोई शंका नही कि अभी भी अच्छे लोग हैं पर निकृष्ट मानसिकता का बोझ कुछ ज़्यादा ही बढ़ गया, आशा है कि हमारे आदर्श नारायण भाऊराव जी ही हैं, महान  विभूति को सादर नमन 🙏 शायद सुनने में आया की वो राष्ट्रीय स्वयम् सेवक संघ के स्वयम्सेवक थे (संस्था जो मानवता और राष्ट्रीयता पर समर्पित) सदियाँ ऐसे देवदूतों को हमेशा याद रखेंगी।

अपना ध्यान रखें मास्क लगाएँ💐




1 टिप्पणी:

  1. #एक_कोविड_पेशेंट_की_कहानी.....
    #1. जब तक कोविड नहीं हुआ-
    टीका नहीं लगवाया, दिन भर यहां वहां घूमा, कोविड तो है ही नहीं, सरकार और पूंजिपतियों का षड़यंत्र है, रिश्तेदारों में गए, शादी विवाह निपटाया....
    #2. एक दिन बुखार महसूस हुआ-वायरल है यार, कोविड-वोविड कुछ नहीं, एक पैरासिटामोल ले लेता हूं।
    #3. बुखार के दूसरे दिन-
    मेडिकल स्टोर से एंटिबायोटिक्स ले लेता हूं, करोना टेस्ट की जरूरत नहीं है, जबरदस्ती पाज़ीटिव बता देंगे।
    #4. बुखार के तीसरे दिन-
    बुखार नहीं उतर रहा तो सीटी स्कैन करा लेता हूं, आरटी- पीसीआर की रिपोर्ट तो चार दिन बाद आएगी ( सीटी का स्कोर पहले दो तीन दिन में 3-4 ही रहता है तो निश्चिंत हो गया कि मैं स्वस्थ हूं)
    #5. बुखार के चौथे दिन-
    आज भी बुखार है, चलो ब्लड टेस्ट करा लेता हूं ( ब्लड टेस्ट में क्रास रिएक्शन की वजह से फाल्स टायफाइड पाज़िटिव दिखता है ये इसे नहीं मालूम) ओ तेरी..., ये तो टायफाइड हो गया है।
    #6.बुखार के पांचवें दिन-
    अब टायफाइड का पता चल ही गया है तो मेडिकल स्टोर से एंटिबायोटिक्स ले लेता हूं, जबरन डाक्टर दो-चार सौ ले लेगा।
    #7. बुखार के छठवें दिन-
    एंटिबायोटिक्स चल रही हैं, पर कमजोरी बहुत लग रही है।
    #8. बुखार के सातवें दिन-
    डाक्टर मित्र को फोन करके पूछा तो उसने कहा आरटीपीसीआर करवाओ, वहां पहुंचे तो बड़ी भीड़ थी बड़ी मुश्किल से टेस्ट हुआ, अब रिपोर्ट तीन दिन में आएगी।
    #9.बुखार के आठवें दिन-
    अब तो उठने बैठने में सांस फूलने लगी, आक्सीजन लेवल चैक करवाया तो 85 निकला डाक्टर ने फौरन भर्ती हो कर आक्सीजन लगवाने को कहा, अब ना कहीं बेड मिल पा रहा और ना आक्सीजन ( सरकार को गरियाना शुरू, साला कोई व्यवस्था नहीं, कोई सुनवाई नहीं)
    जैसे तैसे बेड और आक्सीजन की व्यवस्था हुई
    #10. कोई राहत नहीं (अस्पताल को गरियाना शुरू) आक्सीजन और कम हो गई।
    #11.आज डाक्टर ने कहा वेंटिलेटर लगाना पड़ेगा (डाक्टर को गरियाना शुरू) साले लूटते हैं।
    #12.कहानी खत्म...!! (परिजनों का अस्पताल में हंगामा, पत्रकारों को मसाला, डैड बाडी घर ले जाने दो, खोल कर दिखाओ)
    #13. इसी कोविड साइकिल का अगला मरीज लाईन में है....!!!
    भाईयो, बुखार आते ही क्वालिफाइड डाक्टर से मिलें, उटपटांग सलाह और मनमर्जी से निर्णय नहीं लें, और जांच जरूर करवाएं।
    👏🏻🌹 *घर पर रहे सुरक्षित रहे*🌹👏🏻

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