सम्मानित और स्नेहिल मित्रों
आजकल कोविड की तीसरी लहर का अनदेखा भय व्याप्त हो रहा, अभी द्वितीय लहर ख़त्म भी नही हुई और समाचार चैनल वालों ने एक अनदेखे भय को वातावरण में घोलना शुरू कर दिया ।अच्छा इतना भय तो कभी नही होता जबकि सबको पता है कहीं जाते वक्त किसी भी वाहन का ब्रेक अनियंत्रित हो जाए या सड़कों पर लगे वृक्ष कभी भी ऊपर गिर जाएँ या कोई भवन अनायास गिर जाए और हम चपेट में आ जाएँ तो हमारा जीवित रह पाना मुश्किल होगा, पर हम कभी नही सोंचते। भयभीत क्यूँ नही होना चाहिए इसके बारे में मैं कुछेक बातें बताता हूँ:
प्रथम बिंदु: ये मैं मानता हूँ की प्रथम कोविड लहर की तुलना में द्वितीय लहर थोड़ी कष्टदायक अधिक रही, अधिक व्यक्ति इस बार संक्रमित हुए और कुछेक अपनों को हमने खोया भी, पर ये भी सत्य है जिनको ये वैक्सिन लगी थी उन पर ये असर कम ख़तरनाक था (अपवादों को निकाल दें), सरकारें (राज्य और केंद्र) दोनों वैक्सिनेशन पर समर्पित हैं जिनसे तृतीय लहर को हम कुछ हद तक नियंत्रण कर लेंगे ।
द्वितीय बिंदु: प्रत्येक बार हम ये क्यूँ सोचें कि इसके जीन (वंशानुगत सूत्रों) में बदलाव संक्रमण को ख़तरनाक ही बनाएँगे, ये भी हो सकता है की कोई जीन में ऐसा भी बदलाव आए जो इसके संक्रमण की गति को कम कर दे या समाप्त कर दे (ऐसा बदलाव भी सम्भव है, उक्त बदलाव को जैवप्रोदयोगिकी वाले जीन थेरपी के वाहक वेक्टर में प्रयोग करते हैं) तो ये भी सम्भव है।
तृतीय बिंदु: अब जब हम अपने शत्रु यानि कोरोना को जब समझ गए हैं कि इसका प्रसार व संक्रमण अधिकतर नाक या मुँह के मार्ग से होता है तो हम इसके लिए मास्क का प्रयोग हमेशा करेंगे।
ये सब सोचकर अनदेखा भय अवश्य कम होगा, फिर हमारी शृष्टि का उद्भव आज तो हुआ नही कई कल्प वर्ष व्यतीत हो गए, पौराणिक साक्ष्यों के आधार पर कई युग बीत चुके पर हमारी वंश प्रणाली चलती जा रही । बस अब भोज्य पदार्थों का चयन प्रतिरक्षा प्रणाली को ताकत प्रदान करने वाले ही चुनें,योग प्राणायाम को दिनचर्या में ढालें और ईश्वर पर विश्वास करें सबकुछ पूर्ववत हो जाएगा।किसी विद्वान की सुंदर पंक्तियाँ जीवन दर्शन दर्शाती हुई
“हौंसले मत हार गिरकर वो मुसाफ़िर,ठोकरें इंसान को चलना सिखाती”
सकारात्मक विचारों का ही संग्रह करें,अपना ध्यान रखें व मास्क का प्रयोग करें🙏